Chhattisgarh Weather Update: बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर पड़ने की आशंका है। मौसम में बदलाव के चलते 27 से 29 अक्टूबर के बीच प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। बस्तर संभाग में भारी से अतिभारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को धान की कटाई फिलहाल रोकने और खेतों में रखी फसल को सुरक्षित रखने की सलाह दी है। इस दौरान हवा की रफ्तार 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
बस्तर सहित कई संभागों में बारिश की संभावना
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान को लेकर देश के पांच राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है। इसका प्रभाव छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बादल छाने के साथ बस्तर, रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के कई जिलों में बारिश होने की संभावना है।
मौसम के संभावित बदलाव को ध्यान में रखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि तेज बारिश होती है, तो खेतों में खड़ी धान की फसल गिर सकती है। वहीं, दलहन, तिलहन और सब्जियों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी जरूरी सलाह
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदेश में जल्दी पकने वाली धान की फसल की कटाई का काम चल रहा है। ऐसे में मौसम खराब होने की आशंका को देखते हुए किसानों को कटाई रोकने और काटकर खेतों में रखी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है।
मध्यम और देर से पकने वाली धान की फसल के लिए हल्की बारिश फायदेमंद हो सकती है, लेकिन तेज बारिश से धान की बालियां गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। इसके अलावा, लगातार बादल छाने और बेमौसम बारिश से दलहन एवं तिलहन की फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। सब्जियों के खेतों में जलभराव होने से फसल सड़ने की आशंका भी है।
कृषि मंत्री और आयुक्त ने विभागीय अमले को किया अलर्ट
संभावित चक्रवाती तूफान को देखते हुए किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी तैयार रहने को कहा गया है।
कृषि विशेषज्ञों ने मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बुवाई का काम नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी है। तेज हवाओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए करेला और लौकी जैसी बेल वाली फसलों, केले के पौधों तथा फलदार वृक्षों को आवश्यकतानुसार सहारा देने को कहा गया है।
सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने और बारिश के दौरान कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी गई है।
28 अक्टूबर को भारी से अतिभारी बारिश के आसार
मौसम विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, चक्रवाती तूफान का प्रभाव 27 अक्टूबर से दिखाई दे सकता है। इस दिन बस्तर संभाग के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
28 अक्टूबर: बस्तर संभाग के साथ उससे लगे रायपुर और दुर्ग संभाग के कुछ जिलों में भारी से अतिभारी बारिश हो सकती है।
29 अक्टूबर: प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इसका असर बिलासपुर संभाग के जिलों में भी देखने को मिल सकता है।
30 अक्टूबर: कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का प्रभाव बना रह सकता है।
इस दौरान हवा की गति 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने और फसल सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है।
अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 12 डिग्री, अब बढ़ सकती है रात की गर्मी
प्रदेश में पिछले चार दिनों से मौसम शुष्क रहने के कारण न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही थी। शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं, रायपुर में रात का तापमान 19.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
प्रदेश में रात के समय ठंड महसूस हो रही है, जबकि दिन में तेज धूप का असर बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की दिशा में बदलाव के कारण अब न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। तापमान में दोबारा गिरावट नवंबर महीने में होने की संभावना है।
किसानों के लिए जरूरी संदेश: अगले कुछ दिनों में संभावित बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए धान की कटाई, फसल का भंडारण, खेतों में जल निकासी और सब्जियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही आगे की तैयारी करें।