रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वनभैंसा के संरक्षण की दिशा में अच्छी खबर सामने आई है। राज्य में वनभैंसों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। असम से वर्ष 2020 में दो और 2023 में चार मादा वनभैंसों को लाया गया था। इन छह वनभैंसों की संख्या अब बढ़कर दोगुने से भी अधिक हो गई है।
हाल ही में 15 से 26 अक्टूबर के बीच तीन मादा वनभैंसों ने तीन शावकों को जन्म दिया है। नवजात शावकों को बारनवापारा स्थित बाड़े में विशेष निगरानी में रखा गया है। शावकों और उनकी मां को संक्रमण से बचाने के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
‘मानस’ बना तीनों शावकों का पिता
वन विभाग के अनुसार, असम से लाई गई जिन मादा वनभैंसों ने हाल ही में शावकों को जन्म दिया है, उनके पिता का नाम मानस है। वनभैंसों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी को राज्य में इस दुर्लभ वन्यजीव के संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में छोटू नाम का शुद्ध नस्ल का वनभैंसा राजकीय पशु के रूप में जाना जाता है। उम्रदराज हो चुके छोटू को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के पूर्वी हिस्से में बनाए गए वनभैंसा रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है।
पिछले साल दो शावकों की हुई थी मौत, इसलिए बढ़ाई सतर्कता
वर्ष 2025 में दो शावकों की मौत के बाद वन विभाग इस बार विशेष सावधानी बरत रहा है। मादा वनभैंसों के गर्भवती होने की जानकारी मिलने के बाद ही उन्हें झुंड से अलग कर विशेष देखरेख में रखा गया था। इस दौरान उनके खानपान पर भी खास ध्यान दिया गया।
अब शावकों के जन्म के बाद उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक ओपी यादव ने भी राजकीय पशु के तीन शावकों के जन्म की पुष्टि की है।
हाथियों और दूसरे वन्यजीवों से बचाव के इंतजाम
नवजात शावकों की सुरक्षा के लिए बाड़े के आसपास विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि हाथियों सहित दूसरे वन्यजीवों की पहुंच वहां तक न हो सके। वनभैंसों की निगरानी के लिए अलग गश्ती दल तैनात किया गया है, जो 24 घंटे उनकी सुरक्षा पर नजर रख रहा है।
इसके अलावा बाड़े के आसपास आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। शावकों को फिलहाल लोगों से दूर रखा जा रहा है, ताकि उन्हें किसी तरह का तनाव या संक्रमण न हो।
चिकित्सक और देखभाल करने वालों के लिए भी सख्त नियम
नवजात शावकों और उनकी मां को क्वारंटाइन में रखा गया है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वनभैंसों के पास केवल अधिकृत अधिकारी, केयरटेकर और चिकित्सक ही जा सकेंगे।
शावकों के करीब पहुंचने से पहले अधिकारियों और चिकित्सकों को सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस तरह संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं।
छत्तीसगढ़ में वनभैंसों की बढ़ती संख्या संरक्षण के प्रयासों के लिए उत्साहजनक संकेत है। अब वन विभाग के सामने इन नवजात शावकों को सुरक्षित रखते हुए उनके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने की चुनौती है।