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हाईकोर्ट से मिली राहत : नए सिरे से अब तय होगी मेडिकल कॉलेजों की फीस

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बिलासपुर। निजी मेडिकल कॉलेजों की’ हॉस्टल, मेस और परिवहन शुल्क में कटौती करने तथा स्टूडेंट्स से अधिक वसूली गई राशि लौटाने के निर्देशों को हाईकोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने नए सिरे से शुल्क निर्धारण का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। इस निर्देश के साथ ही कोर्ट ने प्रकरण को राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। 

कॉलेजों की ऐसी दलील 
कॉलेजों की ओर से दलील दी गई थी कि शुल्क तय करते समय भवन, कर्मचारियों के वेतन, बिजली, रखरखाव, ईंधन, परिवहन और अन्य सुविधाओं पर होने वाले वास्तविक खर्च का उचित आकलन नहीं किया गया। विद्यार्थियों की कुल संख्या और हास्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी अलग-अलग शैक्षणिक सत्रों में भिन्न थी। इसके बावजूद समिति ने एक समान आधार पर शुल्क निर्धारित कर दिया। संस्थानों ने यह भी कहा कि सुनवाई का उचित अवसर नहीं मिला।

दोनों मेडिकल कॉलेजों की फीस फिर से तय होगी
हाईकोर्ट ने रायपुर इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और श्रीबालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति को नए सिरे से शुल्क निर्धारण करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि कालेजों के खर्च और विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या सहित संबंधित वित्तीय दस्तावेजों पर विचार करने के बाद ही शुल्क तय किया जाए। नई प्रक्रिया में दोनों संस्थानों को सुनवाई का प्रभावी अवसर देना होगा। 

हॉस्टल-मेस शुल्क घटाने का आदेश रद्द
रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और श्रीबालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ने प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति की 3 अप्रैल 2025 की अनुशंसा तथा राज्य शासन के 18 सितंबर 2025 और आयुक्त चिकित्सा शिक्षा के 23 सितंबर 2025 के आदेशों को चुनौती दी थी। इन आदेशों के जरिए दोनों संस्थानों के हास्टल, मेस और परिवहन शुल्क में कटौती की गई थी और स्टूडेंट्स से वसूले गए अतिरिक्त राशि को लौटाने का निर्देश जारी किया था। श्रीबालाजी मेडिकल कालेज ने प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष हास्टल और मेस के लिए तीन लाख रुपए तथा परिवहन के लिए ढाई लाख रुपए शुल्क प्रस्तावित किया था। समिति ने इन्हें घटाकर क्रमशः 78,059 रुपए और 13,719 रुपए कर दिया था। 

हाईकोर्ट ने कही यह बात
हाईकोर्ट ने कहा कि नियामक समिति को मुनाफाखोरी और निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूली रोकने का अधिकार है। लेकिन उसे संस्थानों द्वारा प्रस्तुत प्रासंगिक वित्तीय दस्तावेजों पर भी विचार करना होगा। केवल सुनवाई का अवसर देना पर्याप्त नहीं है, प्रस्तुत सामग्री का वास्तविक और निष्पक्ष आकलन भी जरूरी है। कोर्ट ने माना कि समिति की अनुशंसा में वास्तविक खर्च, हास्टल में विद्वार्थियों की संख्या और अलग-अलग मदों के व्यय पर उचित विचार किए जाने का स्पष्ट आधार नहीं दिखता।

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