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रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत की पहल, 3-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर यूक्रेन ने जताई सराहना

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नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म कराने के प्रयासों में भारत की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व में भारत ने दोनों देशों के सामने एक व्यावहारिक संघर्ष विराम प्रस्ताव रखा है।

भारत की इस पहल में युद्ध के कारण प्रभावित ऊर्जा ढांचे, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और ब्लैक सी में व्यापारिक गतिविधियों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। यूक्रेन ने भी भारत की पहल की पुष्टि करते हुए इसे व्यापक प्रस्तावों में से एक बताया है।

भारत के 3-सूत्रीय शांति प्रस्ताव में क्या है?

1. ऊर्जा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना

भारत के प्रस्ताव का पहला अहम बिंदु रूस और यूक्रेन की ओर से एक-दूसरे की ऊर्जा सुविधाओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना है।

इसका उद्देश्य बिजली संयंत्रों और अन्य आवश्यक सुविधाओं को सैन्य कार्रवाई से बचाना और आम नागरिकों पर पड़ने वाले युद्ध के प्रभाव को कम करना है।

2. ब्लैक सी से अनाज की सुरक्षित आवाजाही

प्रस्ताव के दूसरे हिस्से में ब्लैक सी के बंदरगाहों के जरिए खाद्यान्न और अनाज की आपूर्ति को सुरक्षित एवं निर्बाध बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

ब्लैक सी क्षेत्र वैश्विक खाद्य आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यहां समुद्री आवाजाही सुरक्षित रहने से अंतरराष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

3. व्यापारिक जहाजों को बनाया जाए सुरक्षित

भारत ने रणनीतिक समुद्री मार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल शिपिंग और व्यापारी जहाजों पर हमले रोकने की भी बात कही है।

इस कदम का मकसद समुद्री व्यापार को सुरक्षित करना और युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर को कम करना है।

जयशंकर बोले- भारत दोनों पक्षों से कर रहा व्यावहारिक बातचीत

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर भारत की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा है कि नई दिल्ली केवल शांति की अपील तक सीमित नहीं है। भारत मॉस्को और कीएव दोनों के साथ सीधे संपर्क में रहकर व्यावहारिक समाधान की दिशा में बातचीत कर रहा है।

बताया गया है कि भारत ने पिछले महीने कीएव की यात्रा के दौरान यूक्रेन के सामने यह संघर्ष विराम योजना रखी थी।

रूस के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद नई दिल्ली लगातार युद्ध को समाप्त करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर देती रही है।

यूक्रेन ने प्रस्ताव को बताया व्यापक

यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा ने पुष्टि की है कि कीएव को भारत की ओर से यह प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।

यूक्रेन की ओर से इसे रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए सामने आई अंतरराष्ट्रीय पहलों में सबसे व्यापक प्रस्तावों में से एक बताया गया है।

अन्य देशों की पहलों की तुलना करें तो मिस्र और तुर्की के प्रस्तावों में मुख्य रूप से ब्लैक सी के जरिए अनाज की सुरक्षित आवाजाही पर जोर दिया गया है। वहीं, अमेरिका की पहल का प्रमुख फोकस ऊर्जा क्षेत्र में संघर्ष विराम पर रहा है।

भारत के प्रस्ताव में ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, खाद्यान्न आपूर्ति और समुद्री व्यापार जैसे कई पहलुओं को एक साथ शामिल किया गया है।

तुर्की, मिस्र और अमेरिका के प्रस्ताव भी चर्चा में

यूक्रेन को युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से तुर्की, मिस्र और अमेरिका की ओर से भी अलग-अलग संघर्ष विराम प्रस्ताव मिले हैं। कीएव ने संकेत दिया है कि वह युद्ध समाप्त करने के लिए विभिन्न प्रारूपों पर बातचीत के लिए तैयार है।

हालांकि, यूक्रेन का मानना है कि किसी भी अंतिम समझौते को केवल सैन्य कार्रवाई रोकने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसमें ऊर्जा और बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे के साथ ब्लैक सी की सुरक्षा को भी शामिल किया जाना जरूरी है।

भारत की 3-सूत्रीय पहल इसी व्यापक दृष्टिकोण के कारण कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाह इस बात पर होगी कि रूस और यूक्रेन इस प्रस्ताव पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इससे व्यापक संघर्ष विराम की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकलता है।

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