धमतरी के टिकरापारा इलाके में रविवार को एक निजी मकान में आयोजित प्रार्थना सभा को लेकर विवाद हो गया। हिंदू संगठनों ने सभा में धर्मांतरण की आशंका जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया, जबकि दूसरी ओर भीम आर्मी ने धार्मिक स्थल पर जाने के लिए अनुमति की जरूरत पर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
जानकारी के मुताबिक, नेशनल हाईवे के पास टिकरापारा स्थित एक मकान में करीब 30 से 40 लोग प्रार्थना सभा में मौजूद थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और सभा का विरोध करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने सभा बंद कराने की मांग की और मौके पर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। विरोध करीब पांच घंटे तक चला।
विरोध के दौरान कुछ समय बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी वहां पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच बहस और नारेबाजी हुई और स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। पुलिस, एसडीएम और तहसीलदार समेत प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और दोनों पक्षों को अलग किया। मुख्य मार्ग पर भी कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होने की रिपोर्ट है।
हिंदू संगठन ने क्या आरोप लगाया?
हिंदू जागरण मंच की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रार्थना सभा की आड़ में गैर-ईसाइयों को शामिल किया जा रहा है और धर्मांतरण की आशंका की जांच होनी चाहिए। संगठन के नेताओं ने दावा किया कि प्रशासन की मौजूदगी में हुई शांति समिति की बैठक में प्रार्थना सभाओं को लेकर कुछ शर्तों पर चर्चा हुई थी और रविवार की सभा में उन शर्तों का पालन नहीं किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हिंदू जागरण मंच ने प्रशासन को ज्ञापन देकर प्रार्थना सभा, आयोजकों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 के प्रावधानों के पालन की जांच की मांग की है।
क्रिश्चियन फोरम ने आरोपों पर क्या कहा?
क्रिश्चियन फोरम के जिला जनरल सेक्रेटरी डॉ. डायमंड फिलस ने आरोपों से अलग पक्ष रखा। उनका कहना है कि प्रार्थना सभा के लिए लगाए गए सूचना बोर्ड ईसाई समुदाय के लिए हैं, किसी व्यक्ति को जबरन नहीं बुलाया जाता और जो लोग आते हैं, वे अपनी इच्छा से आते हैं। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का हवाला दिया।
भीम आर्मी का क्या कहना है?
भीम आर्मी ने इससे पहले भी प्रशासन को ज्ञापन देकर प्रार्थना सभा में अन्य धर्मों के लोगों के प्रवेश को लेकर कथित रोक पर सवाल उठाए थे। संगठन का कहना है कि केवल किसी धार्मिक सभा में मौजूद होने को अपने-आप धर्मांतरण नहीं माना जाना चाहिए और लोगों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।
महापौर और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
विवाद की जानकारी मिलने पर महापौर रामू रोहरा भी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की। प्रशासन की ओर से भी दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया गया। फिलहाल पूरे मामले में लगाए गए आरोपों और सभा की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण है।
धमतरी में प्रार्थना सभाओं को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद सामने आते रहे हैं। सितंबर में भी भीम आर्मी ने इसी मुद्दे पर कलेक्टर को ज्ञापन दिया था। ऐसे में टिकरापारा की घटना ने धार्मिक स्वतंत्रता, प्रार्थना सभाओं और धर्मांतरण के आरोपों को लेकर चल रही बहस को फिर तेज कर दिया है।

टिकरापारा स्थित घर के बाहर हिंदू संगठन और भीम आर्मी के कार्यकर्ता इकट्ठे हुए।

हिंदू संगठनों ने प्रार्थना सभा का विरोध करते हुए हंगामा किया।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया।