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पैक्ड फूड खाते समय जरूर देखें ‘Number of Servings’, वरना गलत हो सकता है कैलोरी का हिसाब

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Health News: चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट और ड्राईफ्रूट्स खरीदते समय सिर्फ स्वाद और कीमत नहीं, पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी भी पढ़ें। जानिए सर्विंग साइज, ग्लूटेन और खाद्य पदार्थों में मिलावट पहचानने से जुड़ी अहम बातें।

आजकल चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट और ड्राईफ्रूट्स जैसे पैक्ड फूड लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन इन्हें खाते समय बहुत से लोग पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी को नजरअंदाज कर देते हैं। खास तौर पर ‘Number of Servings’ यानी पैकेट में कुल कितनी सर्विंग हैं, इस जानकारी को समझना जरूरी है। ऐसा न करने पर व्यक्ति अपनी वास्तविक कैलोरी खपत का गलत अनुमान लगा सकता है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता ने नईदुनिया विमर्श में पैक्ड फूड की लेबलिंग, बच्चों के खानपान, ग्लूटेन और खाद्य पदार्थों में मिलावट से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी।

1. क्या होता है ‘Number of Servings’?

पैक्ड फूड के लेबल पर कैलोरी और पोषक तत्वों की जानकारी अक्सर निर्धारित सर्विंग के हिसाब से दी जाती है। सर्विंग साइज का अर्थ है किसी खाद्य पदार्थ की एक निर्धारित मात्रा, जबकि ‘Number of Servings’ बताता है कि पूरे पैकेट में ऐसी कितनी सर्विंग मौजूद हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी पैकेट में पांच सर्विंग हैं और प्रत्येक सर्विंग में 100 कैलोरी हैं, तो पूरा पैकेट खाने पर कुल 500 कैलोरी मिलेंगी।

इसलिए पैकेट पर लिखी कैलोरी को पूरे पैकेट की कैलोरी समझ लेना गलत हो सकता है। खरीदारी और भोजन के समय इन तीन बातों पर ध्यान दें:

  • सर्विंग साइज: एक सर्विंग में खाद्य पदार्थ की कितनी मात्रा है।
  • कुल सर्विंग: पूरे पैकेट में कितनी सर्विंग मौजूद हैं।
  • पोषण संबंधी जानकारी: प्रत्येक सर्विंग में कितनी कैलोरी, चीनी, वसा, प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व हैं।

2. बच्चों को पैक्ड स्नैक्स देते समय बरतें सावधानी

बच्चों को चिप्स, बिस्कुट और दूसरे पैक्ड स्नैक्स देते समय केवल स्वाद या विज्ञापन देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना भी जरूरी है।

विशेष रूप से चीनी, नमक, संतृप्त वसा और ट्रांस फैट की मात्रा पर ध्यान दें। बच्चों के नियमित खानपान में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

पैक्ड फूड की मात्रा भी महत्वपूर्ण है। यदि कोई बच्चा एक बार में पूरा पैकेट खा लेता है, तो उसकी कैलोरी और नमक की खपत अनुमान से अधिक हो सकती है।

3. ग्लूटेन क्या है और किन लोगों को इससे बचना चाहिए?

ग्लूटेन गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाने वाला प्रोटीन है। अधिकांश लोगों के लिए ग्लूटेन से परहेज करना जरूरी नहीं होता, लेकिन कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में इससे बचना आवश्यक हो सकता है।

किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

  • सीलिएक रोग से पीड़ित लोग: इन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ग्लूटेन-मुक्त आहार अपनाना चाहिए।
  • ग्लूटेन से संबंधित अन्य समस्याओं वाले लोग: डॉक्टर की सलाह के आधार पर भोजन में बदलाव करना चाहिए।
  • डायबिटीज के मरीज: केवल ग्लूटेन होने के कारण किसी खाद्य पदार्थ को छोड़ना जरूरी नहीं है। उन्हें कुल कार्बोहाइड्रेट, चीनी, फाइबर, सर्विंग साइज और समग्र पोषण पर ध्यान देना चाहिए।

ग्लूटेन-मुक्त उत्पाद अपने आप में अधिक पौष्टिक या डायबिटीज के लिए बेहतर हों, यह जरूरी नहीं है। ऐसे उत्पादों में भी चीनी, वसा और कैलोरी की मात्रा देखनी चाहिए।

4. FSSAI के ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान का उद्देश्य

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ईट राइट इंडिया पहल का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ खानपान के प्रति जागरूक करना है। इस पहल के तीन प्रमुख स्तंभ हैं।

ईट सेफ (Eat Safe)

खाद्य पदार्थों की स्वच्छता सुनिश्चित करना, मिलावट पर नियंत्रण रखना और भोजन में हानिकारक पदार्थों की मौजूदगी को रोकना।

ईट हेल्दी (Eat Healthy)

संतुलित आहार को बढ़ावा देना और अधिक नमक, चीनी, संतृप्त वसा तथा ट्रांस फैट के सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

ईट सस्टेनेबल (Eat Sustainable)

स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना, भोजन की बर्बादी कम करना और पर्यावरण के अनुकूल खानपान को प्रोत्साहित करना।

5. हल्दी और लाल मिर्च में मिलावट की पहचान कैसे करें?

खाद्य पदार्थों में मिलावट से बचने के लिए उनकी गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। हल्दी और लाल मिर्च जैसे मसालों में रंग या अन्य पदार्थों की मिलावट की आशंका हो सकती है।

हालांकि, केवल घरेलू जांच के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को मिलावटी या सुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • हल्दी: पानी में डालने पर रंग का तेजी से फैलना कुछ प्रकार की मिलावट की आशंका पैदा कर सकता है, लेकिन इससे मिलावट की पुष्टि नहीं होती।
  • लाल मिर्च पाउडर: पानी में रंग तेजी से निकलना या भारी कणों का नीचे बैठना जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। ये संकेत अपने आप में निर्णायक नहीं हैं।
  • संदेह होने पर: खाद्य पदार्थ का सेवन रोकें और जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा विभाग या मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच कराएं।

मसालों को विश्वसनीय स्रोत से खरीदना और पैकेट की सील, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट तथा अन्य लेबल विवरण देखना भी महत्वपूर्ण है।

6. दूध, घी और पनीर में स्टार्च की जांच से जुड़ी जानकारी

कुछ खाद्य पदार्थों में स्टार्च जैसी मिलावट की जांच के लिए आयोडीन का इस्तेमाल किया जाता है। स्टार्च की मौजूदगी में आयोडीन से नीला या गहरा नीला-काला रंग बन सकता है।

लेकिन घरेलू जांच के परिणामों को अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए। जांच की विधि, नमूने की प्रकृति और अन्य पदार्थों की मौजूदगी से परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।

दूध में स्टार्च

कुछ जांच विधियों में दूध के नमूने को ठंडा करने के बाद आयोडीन मिलाया जाता है। नीला या गहरा रंग स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल घरेलू परीक्षण से दूध की पूरी गुणवत्ता या सुरक्षा का पता नहीं चलता।

घी और मक्खन

घी या मक्खन में आयोडीन डालने पर रंग बदलना स्टार्च जैसे पदार्थों की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। मगर इस परीक्षण से सभी प्रकार की मिलावट की पहचान नहीं की जा सकती।

पनीर और खोया

पनीर या खोया के नमूने में स्टार्च की जांच के लिए भी आयोडीन आधारित परीक्षण इस्तेमाल किए जा सकते हैं। संदिग्ध परिणाम मिलने पर प्रयोगशाला जांच कराना अधिक विश्वसनीय तरीका है।

महत्वपूर्ण सावधानी: खाद्य पदार्थों की जांच के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आयोडीन या टिंचर आयोडीन को खाने-पीने में इस्तेमाल न करें। घरेलू परीक्षण करते समय रसायनों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

7. पैक्ड फूड खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

सेहत के प्रति जागरूक रहने के लिए कुछ छोटी आदतें मददगार हो सकती हैं:

  • पैकेट पर दी गई सर्विंग साइज और कुल सर्विंग की संख्या पढ़ें।
  • कैलोरी की जानकारी को पूरे पैकेट की मात्रा के हिसाब से समझें।
  • चीनी, नमक, संतृप्त वसा और ट्रांस फैट की मात्रा देखें।
  • सामग्री की सूची, एलर्जी संबंधी चेतावनी और एक्सपायरी डेट पढ़ें।
  • बच्चों को पैक्ड स्नैक्स सीमित मात्रा में दें।
  • खाद्य पदार्थों में मिलावट का संदेह होने पर केवल घरेलू परीक्षण पर निर्भर न रहें।

निष्कर्ष

पैक्ड फूड खाते समय केवल स्वाद और ब्रांड पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। सर्विंग साइज, कुल सर्विंग और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ने से कैलोरी तथा अन्य पोषक तत्वों की वास्तविक खपत का बेहतर अंदाजा लगाया जा सकता है। बच्चों के खानपान में विशेष सावधानी रखें और खाद्य पदार्थों में मिलावट का संदेह होने पर प्रमाणित जांच को प्राथमिकता दें।

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