कमजोरी बढ़ती है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है, रिकवरी कमजोर होती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक प्रोटीन की कमी से हार्मोनल असंतुलन और इम्यून सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, जरूरत से ज्यादा प्रोटीन भी उतना ही खतरनाक हो सकता है, खासकर जब यह लंबे समय तक सप्लीमेंट के रूप में लिया जाए।
एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना कितने प्रोटीन की जरूरत होती है, यह उसके वजन, उम्र और जीवनशैली पर निर्भर करता है। आमतौर पर शरीर के प्रति किलो वजन पर करीब 0.8 ग्राम प्रोटीन पर्याप्त माना जाता है। यानी 60 किलो वजन वाले व्यक्ति को लगभग 48 ग्राम प्रोटीन रोज चाहिए। जो लोग नियमित एक्सरसाइज करते हैं, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या बीमारी से उबर रहे लोग—इनकी जरूरत थोड़ी बढ़ सकती है। लेकिन यह बढ़ोतरी भी संतुलन के साथ होनी चाहिए, न कि अंदाधुंध शेक पीकर।
प्रोटीन मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए भी जरूरी है। यह मसल्स मास बनाए रखता है, जिससे शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न करता है, ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है और वजन बढ़ने का खतरा कम होता है। लेकिन प्रोटीन तभी सही तरीके से काम करता है, जब वह ठीक से पच सके। बहुत ज्यादा मात्रा में या गलत सोर्स से लिया गया प्रोटीन गैस, अपच, भारीपन और कब्ज जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। यह दिक्कत सप्लीमेंट के साथ ज्यादा देखने को मिलती है।
यही वजह है कि शरीर की प्रोटीन जरूरत पूरी करने का सबसे सुरक्षित तरीका रोज़मर्रा के खाने से प्रोटीन लेना है। दालें, चना, राजमा, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, सोया, मूंगफली, बीज और नट्स जैसे नेचुरल फूड न सिर्फ प्रोटीन देते हैं, बल्कि उनके साथ फाइबर, मिनरल्स और दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। फाइबर खास तौर पर जरूरी है, क्योंकि यह प्रोटीन के पाचन को आसान बनाता है, पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, ब्लड शुगर को संतुलित रखता है और गट हेल्थ को सुधारता है।
प्रोटीन सप्लीमेंट अपने आप में पूरी तरह गलत नहीं हैं, लेकिन इन्हें भोजन का विकल्प मान लेना सबसे बड़ी भूल है। कुछ खास स्थितियों में—जैसे बहुत ज्यादा फिजिकल ट्रेनिंग, बुजुर्गों में मसल लॉस या सर्जरी के बाद रिकवरी—डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट फायदेमंद हो सकता है। लेकिन बिना जरूरत, बिना जांच और बिना सलाह के लिया गया सप्लीमेंट किडनी, लिवर और पाचन तंत्र पर गंभीर दबाव डाल सकता है।
जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से डिहाइड्रेशन, किडनी पर असर, कैल्शियम लॉस, हड्डियों की कमजोरी और वजन बढ़ने तक का खतरा रहता है। खासतौर पर किडनी, लिवर, डायबिटीज, गाउट या यूरिक एसिड की समस्या वाले लोगों को प्रोटीन लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
कन्नौज की घटना एक कड़वी लेकिन जरूरी चेतावनी है। फिट दिखने की जल्दी में शरीर को प्रयोगशाला बना लेना जानलेवा हो सकता है। प्रोटीन जरूरी है, लेकिन उतना ही जितना शरीर मांगे—न ज्यादा, न कम। समझदारी इसी में है कि सप्लीमेंट को शॉर्टकट न समझें, संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें और किसी भी बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।