ठिठुरन भरी सर्दी सिर्फ कपड़ों की परतें नहीं बढ़ाती, बल्कि शरीर के पुराने दर्दों को भी दोबारा उभार देती है। खासकर कमर दर्द इस मौसम में अक्सर तेज़ हो जाता है। तापमान गिरते ही मांसपेशियों में जकड़न बढ़ती है, जोड़ों के बीच लचीलापन कम होता है और रोज़मर्रा के काम—जैसे उठना, बैठना या झुकना—भी चुनौती बन जाते हैं। कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि सर्दियों का यह बैक पेन धीरे-धीरे रूटीन को प्रभावित करने लगता है।
असल में ठंड के दौरान रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे मांसपेशियों तक रक्त का प्रवाह धीमा पड़ता है। कम धूप मिलने से विटामिन-डी का स्तर भी गिर सकता है और शारीरिक गतिविधियां घटने से रीढ़ के आसपास की नसें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। ऐसे में दर्द और अकड़न का बढ़ना स्वाभाविक है।
अच्छी बात यह है कि राहत के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं। हमारी रसोई में मौजूद कुछ पारंपरिक उपाय सूजन को शांत करने, मांसपेशियों को ढील देने और रीढ़ को भीतर से मज़बूती देने में सहायक हो सकते हैं। सोंठ और गुड़ का मिश्रण शरीर में गर्माहट पैदा करता है और सूजन कम करने में मदद करता है। लहसुन को सरसों के तेल में पकाकर उससे की गई गुनगुनी मालिश नसों को आराम देती है और जकड़न खोलती है। अजवाइन की गर्म पोटली से की गई सिकाई या हॉट वॉटर बैग का इस्तेमाल दर्द को सोखने जैसा असर देता है। रात भर भिगोए मेथी दानों का सेवन जोड़ों की सेहत को सहारा देता है और हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में उपयोगी माना जाता है। वहीं सोने से पहले हल्दी वाला गर्म दूध लेने से सुबह की अकड़न में कमी महसूस हो सकती है, क्योंकि हल्दी का करक्यूमिन प्राकृतिक दर्दनिवारक की तरह काम करता है।
इन घरेलू उपायों के साथ हल्की स्ट्रेचिंग, सही पोस्चर और पर्याप्त धूप लेना भी सर्दियों में कमर को राहत देने में मददगार साबित हो सकता है। थोड़ी-सी सावधानी और नियमित देखभाल से यह मौसम दर्द नहीं, आराम लेकर आ सकता है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।