भारतीय रसोई में खुशबू और स्वाद का खास पहचान माने जाने वाला तेजपत्ता सिर्फ एक मसाला भर नहीं है, बल्कि औषधीय गुणों का ऐसा खज़ाना है जो सेहत को अंदर से मजबूत बनाने का काम करता है। आयुर्वेद में तेजपत्ते को पाचन सुधारने, ब्लड शुगर संतुलित रखने और इम्यून सिस्टम को बेहतर करने वाला माना गया है। इसकी सुगंध भी मन को शांत करने में मददगार होती है, इसलिए इसे स्वास्थ्य और मानसिक सुकून दोनों से जोड़ा जाता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि तेजपत्ता अब केवल बाजार तक सीमित नहीं रहा। थोड़ी समझदारी और नियमित देखभाल के साथ इसे घर में गमले या आंगन में आसानी से उगाया जा सकता है। सही तरीके से लगाया गया पौधा लंबे समय तक हरा-भरा रहता है और जरूरत के मुताबिक ताजा पत्तियां देता रहता है, जिससे आपको हर बार शुद्ध और केमिकल-फ्री तेजपत्ता मिलता है।
तेजपत्ते का पौधा लगाने के लिए मौसम का सही चुनाव बहुत अहम होता है। फरवरी से मार्च और जुलाई से सितंबर का समय इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान तापमान संतुलित रहता है और पौधे की जड़ें जल्दी जम जाती हैं। गमले का चयन करते समय ध्यान रखें कि वह कम से कम 12 से 15 इंच गहरा हो, ताकि जड़ें फैल सकें। मिट्टी में पानी जमा न हो, इसके लिए गार्डन मिट्टी, गोबर की खाद और थोड़ी रेत मिलाकर उपयोग करना बेहतर रहता है।
अगर आप जल्दी पत्तियां पाना चाहते हैं तो बीज की बजाय नर्सरी से छोटा पौधा लगाना ज्यादा फायदेमंद रहता है। पौधे को ऐसी जगह रखें जहां उसे हल्की से मध्यम धूप मिलती रहे। तेजपत्ते के पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, हफ्ते में दो से तीन बार पानी देना काफी होता है। बस इतना ध्यान रखें कि मिट्टी न ज्यादा सूखी रहे और न ही पानी से भरी हुई।
नियमित देखभाल में सूखी और पीली पत्तियों को हटाते रहना चाहिए, जिससे पौधे की ग्रोथ अच्छी बनी रहती है। जब पौधा थोड़ा बड़ा हो जाए, तो जरूरत के अनुसार पत्तियां तोड़ी जा सकती हैं। सही देखरेख के साथ यह पौधा कई वर्षों तक लगातार पत्तियां देता रहता है।
घर में तेजपत्ता उगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको हर समय ताजा, शुद्ध और केमिकल-फ्री पत्तियां मिलती हैं। इससे न केवल पैसे की बचत होती है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी यह एक समझदारी भरा और लाभकारी विकल्प साबित होता है।