पीढ़ियों से भारतीय घरों में हल्दी-दूध को सेहत का खजाना माना जाता रहा है। दादी-नानी का यह आजमाया हुआ नुस्खा सर्दी-खांसी, बदन दर्द, थकान और नींद की परेशानी में किसी रामबाण से कम नहीं है। आज की न्यूट्रिशन साइंस भी इस पारंपरिक ड्रिंक के गुणों पर मुहर लगाती है। हल्दी-दूध, जिसे ‘गोल्डन मिल्क’ भी कहा जाता है, शरीर के लिए एक तरह से प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है।
वैज्ञानिक शोधों के अनुसार हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है, जो शरीर की कोशिकाओं को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। दूध के साथ मिलकर यह न केवल इम्यूनिटी बढ़ाता है, बल्कि शरीर को अंदर से हील करने में भी मदद करता है। यही वजह है कि हल्दी-दूध को सिर्फ घरेलू नुस्खा नहीं, बल्कि एक कंप्लीट न्यूट्रिशन ड्रिंक माना जाता है।
डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के अनुसार, हल्दी-दूध में मौजूद पोषक तत्व शरीर की कई समस्याओं पर एक साथ काम करते हैं। हल्दी में करक्यूमिन के अलावा आयरन, मैंगनीज, पोटेशियम, फाइबर, विटामिन-C और विटामिन-B6 पाए जाते हैं, जो सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने में सहायक हैं। वहीं दूध प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन-D, विटामिन-B12 और फॉस्फोरस से भरपूर होता है, जो हड्डियों, मांसपेशियों और नर्व सिस्टम के लिए जरूरी है।
हल्दी-दूध के फायदे कई स्तरों पर दिखते हैं। यह इम्यूनिटी को मजबूत करता है, सर्दी-खांसी और गले की खराश में राहत देता है, जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को कम करता है और दिनभर की थकान के बाद शरीर को रिकवरी में मदद करता है। यह पाचन को सपोर्ट करता है और नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। अगर इसमें थोड़ी सी काली मिर्च, अदरक या दालचीनी मिला दी जाए, तो करक्यूमिन का अवशोषण और बढ़ जाता है, जिससे इसके फायदे और प्रभावी हो जाते हैं।
डायबिटीज के मरीजों को लेकर भी अक्सर सवाल उठता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक डायबिटिक लोग हल्दी-दूध ले सकते हैं, लेकिन बिना चीनी के। हल्दी ब्लड शुगर कंट्रोल करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में मदद कर सकती है, जबकि दूध में मौजूद नेचुरल शुगर (लैक्टोज) को देखते हुए लो-फैट या स्किम्ड दूध का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है। मात्रा सीमित रखना और नियमित शुगर मॉनिटरिंग जरूरी है।
बच्चों के लिए भी हल्दी-दूध फायदेमंद माना जाता है। यह उनकी इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है, सर्दी-खांसी में राहत देता है और हड्डियों के विकास में मदद करता है। हालांकि एक साल से छोटे बच्चों को यह नहीं देना चाहिए और किसी भी एलर्जी या परेशानी पर डॉक्टर से सलाह जरूरी है।
हल्दी-दूध पीने का सबसे सही समय रात माना जाता है। सोने से आधा से एक घंटा पहले इसे गुनगुना पीने से मांसपेशियों को आराम मिलता है, सूजन और दर्द कम होते हैं और नींद गहरी आती है। खाली पेट इसे पीने से बचना चाहिए। बनाने का तरीका भी सरल है—एक कप दूध को हल्का उबालें, उसमें आधा चम्मच हल्दी डालें, चाहें तो एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं और अच्छी तरह उबालकर गुनगुना पिएं।
एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में एक कप हल्दी-दूध पर्याप्त है। हल्दी की मात्रा आधे चम्मच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ज्यादा हल्दी लेने से पेट में जलन, गैस या एसिडिटी हो सकती है। कुछ लोगों में एलर्जी की संभावना भी रहती है।
कुछ खास परिस्थितियों में हल्दी-दूध से परहेज जरूरी है। जिन लोगों को पित्त की समस्या, कमजोर पाचन, गॉलब्लैडर स्टोन या ब्लीडिंग डिसऑर्डर है, उन्हें इसे लेने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। ब्लड थिनर दवाएं लेने वाले, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह के हल्दी-दूध न लें।
कुल मिलाकर, हल्दी-दूध एक सस्ता, आसान और असरदार घरेलू उपाय है, जो सही मात्रा और सही तरीके से लिया जाए तो शरीर को भीतर से मजबूत बनाता है। यह परंपरा और विज्ञान का ऐसा मेल है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हमारी दादी-नानी के समय में था।