आजकल बाजार में देसी घी के नाम पर इतनी किस्में मौजूद हैं कि आम आदमी के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना मुश्किल हो गया है। कहीं घी बहुत ज्यादा सफेद दिखता है, कहीं जरूरत से ज्यादा पीला, तो कई बार घी दानेदार नजर आता है। ऐसे में सबसे आम सवाल यही उठता है कि जो दानेदार देसी घी दिख रहा है, क्या वह सच में शुद्ध है या फिर उसमें मिलावट की गई है। दरअसल, देसी घी की बनावट, खुशबू और व्यवहार ही उसकी असली पहचान बताते हैं, बस जरूरत है उन्हें सही तरीके से समझने की।
असली देसी घी जब ठंडे मौसम या कम तापमान में जमता है, तो उसमें प्राकृतिक रूप से दाने बन जाते हैं। ये दाने एक जैसे नहीं होते, बल्कि छोटे-बड़े और असमान आकार के होते हैं। हाथ लगाने पर या हल्की गर्माहट मिलने पर ये दाने धीरे-धीरे पिघलने लगते हैं। इसके उलट, मिलावटी या नकली घी अक्सर बहुत स्मूद और एक जैसी बनावट वाला होता है, जिसमें दाने जरूरत से ज्यादा परफेक्ट नजर आते हैं या बिल्कुल नहीं बनते।
घी की शुद्धता पहचानने का एक आसान तरीका हथेली का टेस्ट भी माना जाता है। अगर थोड़ी-सी मात्रा हथेली पर रखते ही कुछ सेकंड में पिघलने लगे, तो यह अच्छे देसी घी का संकेत हो सकता है। नकली घी में मौजूद मिलावटी फैट और केमिकल्स की वजह से वह हाथ की गर्माहट पर भी देर से पिघलता है या बिल्कुल प्रतिक्रिया नहीं देता।
गर्म पानी से किया गया टेस्ट भी काफी भरोसेमंद माना जाता है। जब आधा चम्मच घी गर्म पानी में डालने पर तुरंत ऊपर तैरने लगे और बिना पानी का रंग बदले धीरे-धीरे घुल जाए, तो यह शुद्धता की ओर इशारा करता है। अगर घी नीचे बैठ जाए या पानी में धुंधलापन आ जाए, तो उसमें मिलावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
असली देसी घी की खुशबू हल्की मीठी और प्राकृतिक होती है, जो पकवानों में डालते ही अलग ही महक बिखेर देती है। स्वाद में यह हल्का होता है और मुंह में जाते ही घुलने लगता है। वहीं नकली घी में कई बार केमिकल जैसी गंध आती है और खाने के बाद भारीपन महसूस होता है, जो इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
फ्रिज में रखकर किया गया टेस्ट भी सच्चाई सामने ला सकता है। शुद्ध देसी घी ठंड में जमने पर दानेदार और थोड़ा भुरभुरा टेक्सचर बनाता है, जबकि मिलावटी या वनस्पति मिला घी बहुत सख्त और चिकना दिखाई देता है। रंग भी एक बड़ा संकेत देता है—गाय या भैंस के दूध से बना देसी घी आमतौर पर हल्का पीला या क्रीम कलर का होता है। बहुत ज्यादा सफेद या चटक पीला रंग अक्सर मिलावट की ओर इशारा करता है।
घी खरीदते समय सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी है। बहुत सस्ता घी दिखे तो सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि शुद्ध देसी घी बनाने में समय, मेहनत और अच्छी मात्रा में दूध लगता है। भरोसेमंद ब्रांड या स्थानीय डेयरी से लिया गया घी ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है। सही जानकारी और थोड़ी समझदारी से आप आसानी से असली देसी घी की पहचान कर सकते हैं और सेहत के साथ समझौता करने से बच सकते हैं।