सुबह की जल्दबाज़ी हो या रात का सुकून भरा समय, दूध उबालते ही उसका बर्तन से बाहर छलक जाना लगभग हर घर की आम समस्या है। पलभर की लापरवाही गैस चूल्हा गंदा कर देती है, दूध बर्बाद हो जाता है और कई बार जली हुई बदबू से पूरी रसोई भर जाती है। लेकिन सच यह है कि थोड़ी-सी समझदारी और कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस झंझट से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है।
सबसे पहली बात, दूध उबालने के लिए बर्तन का सही चुनाव बहुत मायने रखता है। गहरे और मोटे तले वाले बर्तन में दूध को फैलने की जगह मिलती है, जिससे उफान आने का खतरा काफी कम हो जाता है। इसके उलट पतले और उथले बर्तन जल्दी गर्म होते हैं और दूध तेजी से उबलकर बाहर आने लगता है।
एक बेहद पुरानी लेकिन कारगर ट्रिक है बर्तन के ऊपरी किनारे पर थोड़ा-सा घी या तेल लगाना। जैसे ही दूध उबलकर ऊपर चढ़ता है, चिकनाई की वजह से वह किनारे से चिपक नहीं पाता और वापस नीचे बैठ जाता है। यह तरीका इतना आसान है कि एक बार अपनाने के बाद आदत बन जाता है।
दूध उबालते समय बर्तन के ऊपर आड़ा रखा गया लकड़ी का चम्मच भी कमाल करता है। जब दूध उफान मारने लगता है, तो चम्मच से टकराकर उसकी गति टूट जाती है और वह बाहर छलकने की बजाय नीचे चला जाता है। खासकर तब यह तरीका बहुत काम आता है, जब आप रसोई में मौजूद तो हों लेकिन लगातार गैस की तरफ देख पाना संभव न हो।
आंच का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। तेज आंच पर दूध अचानक उफान मारता है, जबकि धीमी या मध्यम आंच पर दूध धीरे-धीरे उबलता है और बाहर आने की संभावना काफी कम हो जाती है। थोड़ा समय ज्यादा लग सकता है, लेकिन सफाई और नुकसान से बचाव हो जाता है।
एक और सरल उपाय है दूध डालने से पहले बर्तन में एक-दो चम्मच पानी घुमा लेना। इससे दूध तले में चिपकता नहीं है और उबाल के दौरान ज्यादा झाग भी नहीं बनता। नए बर्तनों में यह ट्रिक खासतौर पर बहुत फायदेमंद साबित होती है।
इन छोटे-छोटे उपायों को रोज़मर्रा की आदत में शामिल कर लिया जाए, तो दूध उबालना अब टेंशन का कारण नहीं रहेगा। न दूध बर्बाद होगा, न चूल्हा गंदा होगा और रसोई भी साफ-सुथरी बनी रहेगी।