आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में खानपान की गड़बड़ी धीरे-धीरे शरीर में पोषण की कमी पैदा कर रही है। लगातार थकान महसूस होना, इम्युनिटी का कमजोर पड़ना, याददाश्त में गिरावट या दिल से जुड़ी दिक्कतें अक्सर किसी बड़ी बीमारी से पहले मिलने वाले संकेत होते हैं। इन्हीं संकेतों के पीछे कई बार ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी छिपी होती है, जिसे लोग आमतौर पर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है। यह दिल की नसों को स्वस्थ रखने, दिमागी कोशिकाओं को एक्टिव बनाए रखने, आंखों की रोशनी को सहारा देने और जोड़ों की सूजन कम करने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी सबसे पहले दिल की सेहत पर असर डालती है। बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा धीरे-धीरे बढ़ सकता है।
दिमाग पर इसका असर और भी गहरा होता है। ध्यान न लगना, चीजें जल्दी भूल जाना और मानसिक थकान महसूस होना ओमेगा-3 की कमी के आम लक्षण माने जाते हैं। लंबे समय तक यह कमी बनी रहे तो ब्रेन फंक्शन भी कमजोर पड़ सकता है। इसी तरह जोड़ों में अकड़न, दर्द और सूजन की समस्या भी बढ़ने लगती है, क्योंकि ओमेगा-3 में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को अंदर से राहत देते हैं।
आंखों की ड्राइनेस, जलन और नजर कमजोर होना भी इस फैटी एसिड की कमी से जुड़ा हो सकता है, खासकर उम्र बढ़ने के साथ। वहीं स्किन और बालों की सेहत पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। त्वचा रूखी और बेजान दिखने लगती है, मुंहासे बढ़ सकते हैं और बालों का झड़ना भी तेज़ हो जाता है।
अच्छी बात यह है कि ओमेगा-3 की कमी को पूरा करना बहुत मुश्किल नहीं है। अलसी के बीज, अखरोट और चिया सीड्स जैसे सस्ते और आसानी से मिलने वाले फूड्स इसमें भरपूर होते हैं। सोयाबीन और सोया ऑयल भी अच्छे विकल्प हैं। जो लोग नॉन-वेज खाते हैं, उनके लिए सैल्मन और सार्डिन जैसी फैटी फिश बेहतरीन सोर्स हैं, जबकि शाकाहारियों के लिए अल्गी ऑयल एक अच्छा विकल्प माना जाता है।
अगर आप चाहते हैं कि दिल मजबूत रहे, दिमाग तेज़ चले और शरीर लंबे समय तक फिट बना रहे, तो ओमेगा-3 को अपनी डाइट का नियमित हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है।