अगर उम्र 40 के पार हो चुकी है और हाल के सालों में चीजें भूलना, ध्यान भटकना, आत्मविश्वास कम होना या बिना वजह घबराहट महसूस होने लगी है, तो इसे सिर्फ उम्र या तनाव का असर मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। हालिया रिसर्च इशारा कर रही है कि डिमेंशिया कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि इसके संकेत दशकों पहले ही दिखने लगते हैं।
हाल ही में The Lancet Psychiatry में प्रकाशित University College London (UCL) की एक अहम स्टडी ने इस ओर ध्यान खींचा है। रिसर्च में मिड-लाइफ यानी 40–55 साल की उम्र के दौरान दिखने वाले कुछ खास डिप्रेसिव और बिहेवियरल बदलावों को भविष्य में डिमेंशिया के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है। अध्ययन के मुताबिक डिमेंशिया रातोंरात नहीं होता, बल्कि इसका आधार दिमाग में वर्षों पहले पड़ने लगता है।
रिसर्च बताती है कि आत्मविश्वास में गिरावट, लगातार बेचैनी, इमोशनल बदलाव, फोकस की कमी और काम के बाद भी संतोष न मिलना सिर्फ डिप्रेशन के लक्षण नहीं हो सकते। ये संकेत दिमाग में चल रहे न्यूरोडीजेनेरेटिव प्रोसेस की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं, यानी ब्रेन सेल्स का धीरे-धीरे कमजोर होना।
Alzheimer’s Disease International की वर्ल्ड अल्जाइमर रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में हर तीन सेकेंड में एक नया व्यक्ति डिमेंशिया का शिकार हो रहा है। अगर समय रहते रोकथाम पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दशकों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
इस विषय पर बात करते हुए अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट Dr. Zubair Sarkar बताते हैं कि मिड-एज में दिखने वाले मानसिक और भावनात्मक बदलावों को हल्के में लेना ठीक नहीं है। रिसर्च में सामने आया है कि खुद पर भरोसा कम होना, समस्याओं से बचने की प्रवृत्ति, अपनों से भावनात्मक दूरी, लगातार तनाव, निर्णय लेने में दिक्कत और एक काम पर टिके न रह पाना—ये सभी भविष्य में कॉग्निटिव गिरावट के संकेत हो सकते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ आदतें भी दिमाग पर चुपचाप नकारात्मक असर डालती हैं। खराब नींद, शारीरिक गतिविधि की कमी, जंक फूड, ज्यादा स्क्रीन टाइम, सोशल आइसोलेशन और लगातार मानसिक तनाव ब्रेन एजिंग की रफ्तार को तेज कर सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि लाइफस्टाइल में सही बदलाव करके इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ब्रेन हेल्थ के लिए एक्सपर्ट्स ‘माइंड डाइट’ को फायदेमंद मानते हैं, जो मेडिटेरेनियन और डैश डाइट का मिश्रण है। इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, जामुन, नट्स, साबुत अनाज, मछली, अंडे और ऑलिव ऑयल जैसे हेल्दी फैट्स शामिल होते हैं। रिसर्च के मुताबिक ऐसी डाइट दिमाग में सूजन कम करती है और ब्रेन एजिंग को धीमा करती है।
डॉक्टर यह भी साफ करते हैं कि सामान्य भूलने की समस्या और डिमेंशिया में फर्क है। कभी-कभार भूलना आम बात है और यह विटामिन-D या विटामिन-B12 की कमी से भी हो सकता है। लेकिन जब भूलने के साथ-साथ सोचने, समझने, निर्णय लेने और व्यवहार पर असर पड़ने लगे, तब यह डिमेंशिया की ओर इशारा कर सकता है।
निष्कर्ष यही है कि डिमेंशिया सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। इसके बीज मिड-एज में ही पड़ सकते हैं। समय रहते संकेतों को पहचानना, हेल्दी ब्रेन हैबिट्स अपनाना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे बड़ा बचाव है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लक्षण या इलाज को लेकर निर्णय लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।