हंसी से लाखों चेहरों को रोशन करने वाले कपिल शर्मा ने हाल ही में अपने जीवन के उस दौर को याद किया, जब पर्दे के पीछे उनकी दुनिया बिखर चुकी थी। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बड़ी पहचान बनाने के बावजूद उन्होंने स्वीकार किया कि सफलता की चमक के बीच वे गहरे अवसाद से गुजर रहे थे।
कपिल ने बताया कि 2004 में उनके पिता का निधन उनके जीवन का सबसे बड़ा झटका था। उस समय वे अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे, लेकिन पिता के जाने के बाद सब कुछ जैसे ठहर गया। उन्होंने कहा कि जब वे 36 साल के थे, तब डिप्रेशन ने उन्हें बुरी तरह घेर लिया था। लोग यहां तक कहने लगे थे कि उनका करियर खत्म हो गया है।
उन्होंने याद किया कि जब उन्होंने The Great Indian Laughter Challenge जीतकर 10 लाख रुपये का पुरस्कार हासिल किया, तो मंच पर खड़े होकर वे रो पड़े। वजह जीत नहीं थी, बल्कि यह अहसास था कि उनके पिता उस पल को देखने के लिए मौजूद नहीं थे। यही जीत उनके लिए उम्मीद की पहली किरण भी बनी।
अमृतसर से मुंबई तक का उनका सफर आसान नहीं था। सिंगर बनने का सपना लेकर निकले कपिल को असली पहचान कॉमेडी से मिली। बाद में Comedy Nights with Kapil और फिर The Kapil Sharma Show ने उन्हें घर-घर का नाम बना दिया। टेलीविजन पर उनकी सफलता ने उनकी किस्मत बदल दी और वे देश के सबसे लोकप्रिय कॉमेडियनों में शामिल हो गए।
कपिल ने फिल्मों में भी कदम रखा। Kis Kisko Pyaar Karoon से बॉलीवुड में डेब्यू करने के बाद उन्होंने ‘फिरंगी’, Zwigato और Crew जैसी फिल्मों में काम किया।
फिलहाल वे नेटफ्लिक्स पर The Great Indian Kapil Show होस्ट कर रहे हैं, जो लगातार दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। चार सीजन पूरे हो चुके हैं और शो को पांचवें सीजन के लिए रिन्यू किया जा चुका है।
कपिल की कहानी सिर्फ एक कॉमेडियन की सफलता की नहीं, बल्कि टूटकर फिर से खड़े होने की कहानी है। पिता की याद, डिप्रेशन का दौर और फिर खुद को संभालकर नई शुरुआत—यह सफर बताता है कि जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बीच उम्मीद की रोशनी हमेशा बची रहती है।