चेहरे पर बार-बार पिंपल्स निकलना सिर्फ बाहरी गंदगी का नतीजा नहीं होता, बल्कि इसके पीछे शरीर के अंदर होने वाले बदलाव भी जिम्मेदार होते हैं। हर कोई साफ और ग्लोइंग स्किन चाहता है, लेकिन मुंहासे आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि समस्या को दबाने के बजाय उसकी जड़ को समझा जाए।
मुंहासे तब बनते हैं जब त्वचा के रोमछिद्र तेल, डेड स्किन सेल्स और गंदगी से बंद हो जाते हैं। हार्मोनल बदलाव इसका सबसे बड़ा कारण है। किशोरावस्था, पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या ज्यादा तनाव के दौरान शरीर में एंड्रोजन हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे सीबम यानी त्वचा का तेल ज्यादा बनने लगता है। यही अतिरिक्त तेल बैक्टीरिया के साथ मिलकर पिंपल्स को जन्म देता है।
इसके अलावा ऑयली स्किन, गलत या भारी मेकअप प्रोडक्ट्स, जंक फूड, ज्यादा मीठा और डेयरी उत्पादों का सेवन, नींद की कमी और लगातार तनाव भी मुंहासों को बढ़ा सकते हैं। बार-बार चेहरे को छूना, गंदा तकिया कवर या मोबाइल स्क्रीन की गंदगी भी बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है।
पिंपल्स से बचने के लिए स्किन केयर रूटीन संतुलित होना चाहिए। दिन में दो बार हल्के, सल्फेट-फ्री फेसवॉश से चेहरा साफ करें। ऑयल-फ्री और नॉन-कॉमेडोजेनिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। हफ्ते में एक-दो बार हल्का एक्सफोलिएशन करें, लेकिन ज्यादा स्क्रब करने से बचें। खानपान में सुधार लाएं, तला-भुना और ज्यादा मीठा कम करें, और रोज 7–8 घंटे की नींद लें।
अगर पिंपल हो जाए तो उसे फोड़ने की गलती न करें, क्योंकि इससे दाग और इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। डॉक्टर की सलाह से सैलिसिलिक एसिड या बेंज़ोयल पेरोक्साइड युक्त क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है। हल्के मामलों में एलोवेरा जेल या टी ट्री ऑयल भी मददगार हो सकते हैं।
यदि मुंहासे लगातार बढ़ रहे हों, दर्दनाक सिस्टिक एक्ने बन रहे हों या बार-बार लौट रहे हों, तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। सही इलाज, संतुलित जीवनशैली और नियमित देखभाल से मुंहासों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।