सुबह का नाश्ता अगर हल्का हो, पेट भरने वाला हो और स्वाद में ऐसा कि मन खुश कर दे, तो पोहा से बेहतर विकल्प कम ही मिलते हैं। लेकिन असली जादू तब होता है जब वही साधारण पोहा खट्टे-मीठे फ्लेवर के साथ बिल्कुल स्ट्रीट-स्टाइल अंदाज़ में तैयार हो। यही वजह है कि इंदौर की गलियों से मशहूर हुआ खट्टा-मीठा पोहा आज हर शहर की पसंद बन चुका है।
घर पर अक्सर शिकायत रहती है कि पोहा वैसा नहीं बन पाता जैसा बाहर मिलता है। कभी वह सूखा रह जाता है, कभी चिपचिपा हो जाता है और कभी स्वाद फीका लगने लगता है। दरअसल, फर्क पड़ता है छोटी-छोटी तकनीकों से—पानी का सही इस्तेमाल, मसालों का संतुलन और सबसे जरूरी, खट्टे-मीठे स्वाद का सही बैलेंस।
सबसे पहले मोटा पोहा लें। उसे छलनी में डालकर हल्के पानी से जल्दी-जल्दी धो लें। ध्यान रहे कि पोहा को पानी में भिगोकर न रखें, वरना वह गीला और लिसलिसा हो जाएगा। धोने के बाद उसे पांच मिनट के लिए अलग रख दें, ताकि वह हल्का नरम हो जाए लेकिन दाने अलग-अलग बने रहें।
अब कड़ाही में मध्यम आंच पर तेल गरम करें। तेल गरम होते ही राई डालें। राई के चटकते ही जीरा और करी पत्ता डाल दें। जैसे ही खुशबू आने लगे, बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च डालकर हल्का गुलाबी होने तक भूनें। इसके बाद उबली हुई मूंगफली डालें। मूंगफली को ज्यादा न पकाएं, ताकि उसमें हल्का क्रंच बना रहे—यही टेक्सचर पोहा को खास बनाता है।
अब हल्दी, नमक और एक छोटा चम्मच चीनी डालें। यही चीनी वह छोटा सा राज है जो पोहा में रेस्टोरेंट जैसा मीठा टच देता है। इसके बाद नरम किया हुआ पोहा कड़ाही में डालें और बहुत हल्के हाथों से मिलाएं, ताकि दाने टूटें नहीं। इसे धीमी आंच पर दो-तीन मिनट पकाएं।
गैस बंद करने से ठीक पहले ताजा नींबू का रस डालें। नींबू की खटास और चीनी की मिठास जब संतुलित होती है, तभी बनता है असली खट्टा-मीठा स्वाद। यही बैलेंस इंदौरी पोहा की पहचान है।
तैयार पोहा को प्लेट में निकालें। ऊपर से हरा धनिया, अनार के दाने और भरपूर सेव डालकर सजाएं। चाहें तो हल्की सी भुजिया या नमकीन भी डाल सकते हैं। गरमा-गरम चाय के साथ यह पोहा न सिर्फ पेट भरेगा, बल्कि दिन की शुरुआत को भी खास बना देगा।
अब जब भी मन करे स्ट्रीट-स्टाइल नाश्ते का, तो बाहर जाने की जरूरत नहीं—इन आसान ट्रिक्स के साथ घर पर ही बनाएं परफेक्ट खट्टा-मीठा पोहा और तारीफें बटोरें।