सुबह की ओस भरी घास पर नंगे पैर चलना भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है। अक्सर कहा जाता है कि इससे आंखों की रोशनी तेज होती है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह धारणा पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। नंगे पैर घास पर चलने से सीधे तौर पर न तो चश्मे का नंबर कम होता है और न ही मायोपिया या हाइपरोपिया जैसी दृष्टि संबंधी समस्याएं ठीक होती हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि यह आदत बेकार है। दरअसल, इसे “अर्थिंग” या “ग्राउंडिंग” कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति सीधे धरती के संपर्क में आता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि प्रकृति के संपर्क में समय बिताने से मानसिक तनाव कम होता है, नींद बेहतर होती है और शरीर में सूजन के स्तर में कमी आ सकती है।
आंखों की रोशनी पर क्यों नहीं पड़ता सीधा असर?
आंखों की रोशनी मुख्य रूप से आंख की संरचना, लेंस की क्षमता और रेटिना की स्थिति पर निर्भर करती है। रिफ्रैक्टिव एरर (जैसे मायोपिया) आंख के आकार और फोकसिंग मैकेनिज्म से जुड़ी समस्या है, जिसे सिर्फ घास पर चलने से ठीक नहीं किया जा सकता।
लेकिन सुबह प्रकृति के बीच समय बिताना डिजिटल लाइफस्टाइल से राहत जरूर देता है। लगातार स्क्रीन देखने से जो डिजिटल आई स्ट्रेन होता है, उसमें कमी आ सकती है।
तनाव और आंखों का गहरा संबंध
जब हम अत्यधिक तनाव में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह नसों और मांसपेशियों पर असर डाल सकता है। घास पर नंगे पैर चलने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जो शरीर को रिलैक्स मोड में ले जाता है।
जब दिमाग शांत होता है, तो आंखों की फोकस करने वाली मांसपेशियों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है। इससे धुंधलापन, थकान और आंखों में भारीपन जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
अर्थिंग के अन्य संभावित फायदे
सुबह की ताजी हवा, हरियाली और प्राकृतिक प्रकाश शरीर के सर्कैडियन रिदम को संतुलित करने में मदद करते हैं। इससे नींद बेहतर होती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है।
साथ ही, ठंडी घास पर चलना पैरों के नर्व एंडिंग्स को सक्रिय करता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर में स्फूर्ति आती है।
निष्कर्ष
घास पर नंगे पैर चलना आंखों की रोशनी बढ़ाने का जादुई उपाय नहीं है, लेकिन यह तनाव कम करने, मानसिक शांति पाने और डिजिटल थकान घटाने में जरूर मददगार हो सकता है। यानी यह आंखों को सीधे ठीक नहीं करता, लेकिन उन्हें आराम देने में सहायक हो सकता है।
अगर आपको दृष्टि से जुड़ी कोई समस्या है, तो नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना ही सबसे सही विकल्प है।