दुनियाभर में कैंसर पहले से ही एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बना हुआ है, लेकिन ताजा अनुमानों ने आने वाले समय की तस्वीर और ज्यादा चिंताजनक कर दी है। 60 कैंसर संगठनों के समूह ‘One Cancer Voice’ ने चेतावनी दी है कि अगले दो दशकों में केवल ब्रिटेन में ही करीब 63 लाख नए कैंसर मामलों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक देश की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए बड़ा अलर्ट मान रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो 2040 तक कैंसर के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकते हैं। आशंका जताई गई है कि हालात इतने गंभीर हो सकते हैं कि हर दो मिनट में एक नए व्यक्ति में कैंसर का निदान हो। यह अनुमान स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव और संसाधनों की कमी की ओर इशारा करता है।
विश्लेषण में सामने आया है कि ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और फेफड़ों (लंग) के कैंसर के मामलों में सबसे तेज वृद्धि देखी जा सकती है। इसके अलावा बाउल (कोलोरेक्टल) और मेलेनोमा स्किन कैंसर भी तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी में शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ने वाली आबादी, जीवनशैली में बदलाव और पर्यावरणीय कारक इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं।
Cancer Research UK की मुख्य कार्यकारी मिशेल मिशेल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जीवनकाल में लगभग हर दो में से एक व्यक्ति को कैंसर का जोखिम हो सकता है। उनके अनुसार, अगर अभी से रोकथाम और शुरुआती जांच पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण काम कर रहे हैं। मोटापे की बढ़ती दर, असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का सेवन और कुछ प्रकार के कैंसर से बचाने वाली वैक्सीन का कम उपयोग प्रमुख कारकों में शामिल हैं। यूके में समय से पहले होने वाली कैंसर मौतों का सबसे बड़ा कारण अब भी तंबाकू है। उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाओं में होने वाला डैमेज भी कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
चिंता की एक और बड़ी वजह बच्चों में कैंसर के मामलों में वृद्धि है। भारत में हर साल लगभग 50 हजार बच्चे कैंसर से प्रभावित होते हैं, जो कुल मामलों का 3-5% हिस्सा है। बच्चों में ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और ब्रेन ट्यूमर सबसे आम पाए जाते हैं। यह संकेत देता है कि कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है।
विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी रणनीति है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तंबाकू और शराब से दूरी, समय-समय पर स्क्रीनिंग और वैक्सीनेशन जैसे कदम कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। साथ ही, स्वास्थ्य नीतियों में निवेश और जागरूकता अभियान भी उतने ही जरूरी हैं।
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट आने वाले वर्षों की संभावित स्वास्थ्य चुनौतियों का स्पष्ट संकेत देती है। यदि अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कैंसर का बोझ स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज दोनों के लिए भारी साबित हो सकता है।