आज की भागदौड़ भरी और सिडेंटरी लाइफस्टाइल ने सेहत से जुड़ी कई नई समस्याओं को जन्म दिया है। इन्हीं में से एक है Sarcopenia, जिसे आमतौर पर बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह 30–40 की उम्र में भी तेजी से देखने को मिल रही है। अगर सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलने लगे, वजन उठाने में दिक्कत हो या शरीर पहले जैसा मजबूत महसूस न हो, तो यह इस साइलेंट समस्या का संकेत हो सकता है।
दरअसल, सार्कोपेनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और उनका मास कम होता जाता है। इसका असर सिर्फ ताकत पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। धीरे-धीरे व्यक्ति को चलने-फिरने, संतुलन बनाए रखने और छोटे-छोटे काम करने में भी परेशानी होने लगती है।
इस समस्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। उम्र के साथ शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जैसे ग्रोथ हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन और IGF-1 का स्तर घटने लगता है। इसके अलावा शरीर की प्रोटीन उपयोग करने की क्षमता भी कम हो जाती है। नर्व सेल्स की संख्या घटने से मांसपेशियों को सही सिग्नल नहीं मिल पाता। वहीं, खराब लाइफस्टाइल, कम फिजिकल एक्टिविटी और क्रॉनिक बीमारियां इस समस्या को और तेजी से बढ़ाती हैं।
इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। जैसे जल्दी थकान महसूस होना, चलने की गति धीमी होना, बैलेंस बिगड़ना या बार-बार गिरने का डर। समय के साथ यह स्थिति गंभीर हो सकती है और हड्डियों की कमजोरी, फ्रैक्चर और मोटापे जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है। कई मामलों में व्यक्ति दूसरों पर निर्भर भी हो सकता है।
महिलाओं में यह खतरा मेनोपॉज के बाद और बढ़ जाता है। शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं और नई मसल्स बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
हालांकि अच्छी बात यह है कि सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। नियमित एक्सरसाइज—खासकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग—मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करती है। इसके साथ ही प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार, जैसे दालें, अंडे, दूध, नट्स और हरी सब्जियां, शरीर को जरूरी पोषण देते हैं।
डॉक्टर्स का मानना है कि अगर समय रहते इसके संकेतों को पहचान लिया जाए और लाइफस्टाइल में बदलाव किए जाएं, तो मसल्स की कमजोरी की गति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, बढ़ती उम्र को रोकना संभव नहीं है, लेकिन शरीर को मजबूत बनाए रखना पूरी तरह हमारी आदतों और जीवनशैली पर निर्भर करता है। इसलिए आज से ही एक्टिव रहें, सही खानपान अपनाएं और अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें।