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‘एनपीएस संचय’ से बदलेगी तस्वीर—असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को मिलेगा पेंशन का सहारा

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देश में पेंशन को लंबे समय तक सिर्फ सरकारी कर्मचारियों या बड़ी कंपनियों में काम करने वाले लोगों की सुविधा माना जाता रहा, लेकिन अब यह सोच तेजी से बदल रही है। बदलती अर्थव्यवस्था और सामाजिक जरूरतों के बीच अब सरकार और नियामक संस्थाएं इस दिशा में बड़े कदम उठा रही हैं। इसी कड़ी में पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण एक नई पहल ‘एनपीएस संचय’ योजना के रूप में सामने ला रहा है, जिसका उद्देश्य देश के असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है।

यह योजना राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के ढांचे पर आधारित होगी और फिलहाल इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। आने वाले समय में इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता और स्वचालित निवेश प्रणाली है, जो आम लोगों के लिए इसे बेहद सहज बनाती है।

दरअसल, आमतौर पर निवेश करते समय लोगों को इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड्स के बीच संतुलन बनाना पड़ता है, जो एक जटिल प्रक्रिया होती है। लेकिन ‘एनपीएस संचय’ में यह जिम्मेदारी सिस्टम खुद संभालेगा। यानी निवेशक को यह तय करने की जरूरत नहीं होगी कि पैसा कहां और कितना लगाया जाए। इससे खासतौर पर उन लोगों को फायदा मिलेगा, जो वित्तीय जानकारी या अनुभव की कमी के कारण निवेश से दूर रहते हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 50 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे श्रमिकों की है, जो किसी भी सामाजिक सुरक्षा योजना जैसे पीएफ या ईएसआई के तहत कवर नहीं हैं। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत 31.63 करोड़ श्रमिक भी इसी सच्चाई को दर्शाते हैं कि देश का एक बड़ा वर्ग रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा से वंचित है। खास बात यह है कि इनमें 54 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं, जो इस योजना की जरूरत को और भी अहम बना देता है।

रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, छोटे दुकानदार, दिहाड़ी मजदूर और खेती से जुड़े श्रमिक—ये सभी वर्ग अक्सर भविष्य की आर्थिक योजना से दूर रह जाते हैं। ऐसे में ‘एनपीएस संचय’ उनके लिए एक नई उम्मीद बनकर उभर रही है, जहां वे छोटी-छोटी बचत के जरिए अपने लिए सुरक्षित रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकेंगे।

इस योजना का ढांचा सरकारी कर्मचारियों के एनपीएस मॉडल की तरह होगा, जिसमें फंड का आवंटन पहले से तय अनुपात में किया जाता है। इससे निवेश प्रक्रिया आसान हो जाती है और जोखिम भी संतुलित रहता है। यही कारण है कि इसे खासतौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें निवेश के तकनीकी पहलुओं की ज्यादा जानकारी नहीं है।

एस रमन के अनुसार, ‘एनपीएस संचय’ सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो उन लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करेगा, जिनके पास बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होता। यह योजना न केवल आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि देश के लाखों परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

स्पष्ट है कि ‘एनपीएस संचय’ सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रयास है जो भारत के असंगठित कार्यबल को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में इसका असर देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर भी देखने को मिल सकता है।

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