आज की व्यस्त जिंदगी में तनाव लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और खराब लाइफस्टाइल का असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन रिलीज होता है, जिसे आमतौर पर स्ट्रेस हार्मोन कहा जाता है। यह शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक तनाव रहने पर इसका संतुलन प्रभावित हो सकता है।
ऐसे में कुछ रोजमर्रा की आदतें तनाव को मैनेज करने और शरीर को रिलैक्स रखने में मदद कर सकती हैं।
1. अश्वगंधा लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें
अश्वगंधा का इस्तेमाल आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है। कुछ अध्ययनों में इसे तनाव और कॉर्टिसोल से जुड़े प्रभावों के संदर्भ में देखा गया है। हालांकि, इसे सप्लीमेंट के रूप में लेने से पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
2. तुलसी की चाय को रूटीन में शामिल कर सकते हैं
तुलसी भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाली लोकप्रिय जड़ी-बूटी है। तनाव या मानसिक थकान के दौरान तुलसी की चाय एक आरामदायक ड्रिंक हो सकती है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
3. रोज करें प्राणायाम और डीप ब्रीदिंग
तनाव महसूस होने पर कुछ मिनट धीरे-धीरे गहरी सांस लेना शरीर और दिमाग को शांत करने में मदद कर सकता है। रोजाना अनुलोम-विलोम, डीप ब्रीदिंग या मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को रूटीन में शामिल किया जा सकता है।
4. नींद का समय रखें तय
अच्छी नींद तनाव को मैनेज करने के लिए बेहद जरूरी है। कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बने। सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें और रात में ज्यादा चाय-कॉफी लेने से बचें।
5. डाइट और फिजिकल एक्टिविटी पर दें ध्यान
तनाव कम करने के लिए केवल किसी एक ड्रिंक या सप्लीमेंट पर निर्भर रहना सही नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना जरूरी है।
डाइट में दाल, हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और नट्स जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। रोजाना वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज भी रूटीन का हिस्सा बनाएं। साथ ही शरीर को पर्याप्त आराम और रिकवरी का समय देना भी जरूरी है।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प न मानें। किसी भी हर्बल प्रोडक्ट या सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लें।