वाहनों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलती गैसें, निर्माण कार्य और पराली जलाने जैसी गतिविधियां हवा को लगातार जहरीला बना रही हैं। खासतौर पर सर्दियों में जब स्मॉग की मोटी चादर छा जाती है, तब सांस लेना तक चुनौती बन जाता है। आंखों में जलन, लगातार खांसी, एलर्जी, सीने में जकड़न और फेफड़ों से जुड़ी दिक्कतें आम हो जाती हैं। ऐसे हालात में सिर्फ मास्क पहनना काफी नहीं होता, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत करना भी जरूरी हो जाता है। यहीं पर घरेलू नुस्खे बड़ी भूमिका निभाते हैं।
तुलसी को आयुर्वेद में प्राकृतिक औषधि माना गया है। सुबह खाली पेट तुलसी के पत्ते चबाने या उसका काढ़ा पीने से फेफड़ों को साफ रखने में मदद मिलती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदूषण से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक होते हैं और सांस से जुड़ी परेशानियों में राहत देते हैं।
रात को सोने से पहले गुनगुना हल्दी वाला दूध पीना भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गले और फेफड़ों की सूजन को कम करते हैं। जिन लोगों को प्रदूषण के कारण खांसी, गले में जलन या भारीपन महसूस होता है, उनके लिए यह उपाय खास तौर पर असरदार साबित हो सकता है।
गुड़ और शहद भी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। रोज थोड़ी मात्रा में गुड़ खाने से शरीर में जमे टॉक्सिन्स बाहर निकलने लगते हैं। वहीं सुबह गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से गले को आराम मिलता है और फेफड़ों पर प्रदूषण का असर कम होता है।
अगर नाक बंद रहने, गले में खराश या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है, तो भाप लेना एक आसान लेकिन कारगर उपाय है। गर्म पानी में थोड़ा सा अजवाइन या नीलगिरी का तेल डालकर भाप लेने से सांस की नलियां खुलती हैं और फेफड़ों को तुरंत राहत मिलती है।
सिर्फ बाहर की हवा ही नहीं, घर के अंदर की हवा को साफ रखना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए घर में एलोवेरा, मनी प्लांट और तुलसी जैसे पौधे लगाना फायदेमंद रहता है। ये पौधे हवा को शुद्ध करने के साथ ऑक्सीजन का स्तर भी बेहतर बनाते हैं, जिससे घर का वातावरण ज्यादा हेल्दी रहता है।
प्रदूषण के असर को कम करने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने से शरीर के अंदर जमा हानिकारक तत्व बाहर निकलते हैं। साथ ही विटामिन C से भरपूर फल जैसे संतरा, आंवला और नींबू डाइट में शामिल करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और फेफड़ों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।
योग और प्राणायाम भी प्रदूषण से लड़ने में मददगार साबित होते हैं। अनुलोम-विलोम, कपालभाति जैसे प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं और सांस से जुड़ी समस्याओं को कम करते हैं। रोज सुबह खुली और अपेक्षाकृत साफ जगह पर योग करने से शरीर अंदर से मजबूत बनता है और जहरीली हवा का असर काफी हद तक कम हो जाता है।
हालांकि वायु प्रदूषण से पूरी तरह बच पाना मुश्किल है, लेकिन इन घरेलू उपायों और स्वस्थ आदतों को अपनाकर इसके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर आप भी जहरीली हवा के बीच खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इन आसान नुस्खों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा जरूर बनाएं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।