Rice Side Effects: इन 5 हेल्थ कंडीशन में चावल बना सकता है नुकसान की वजह, ज़रा-सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

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भारत में चावल सिर्फ भोजन नहीं, रोज़मर्रा की आदत है। सुबह की खिचड़ी हो या दोपहर की थाली, कई घरों में चावल के बिना खाना अधूरा लगता है। लेकिन हर शरीर एक जैसा नहीं होता और हर सेहत में चावल फायदेमंद भी नहीं रहता। चावल में मौजूद ज्यादा कार्बोहाइड्रेट कुछ खास हेल्थ कंडीशन में शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसे में बिना सोचे-समझे रोज़ चावल खाना फायदे की जगह परेशानी बढ़ा सकता है।

डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए सफेद चावल खासतौर पर जोखिम भरा माना जाता है। इसका हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स ब्लड शुगर को तेजी से ऊपर ले जा सकता है। लगातार चावल खाने से शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है, जिससे थकान, चक्कर और आगे चलकर दूसरी जटिलताएं बढ़ने का खतरा रहता है।

वजन बढ़ने की समस्या में भी चावल अक्सर चुपचाप नुकसान करता है। चावल जल्दी पच जाता है, जिससे थोड़ी देर में फिर भूख लगने लगती है। यही आदत ओवरईटिंग की ओर ले जाती है और वजन कम करने की कोशिशों पर पानी फेर देती है। खासकर रिफाइंड सफेद चावल इस मामले में सबसे ज्यादा बाधा बनता है।

फैटी लिवर की समस्या वाले लोगों को भी चावल के सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए। सफेद चावल में फाइबर कम और स्टार्च ज्यादा होता है, जो लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने की आशंका बढ़ा सकता है। समय के साथ इससे लिवर की कार्यक्षमता पर असर पड़ने लगता है और स्थिति गंभीर हो सकती है।

कुछ लोगों का पाचन तंत्र चावल के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता। चावल खाने के बाद गैस, ब्लोटिंग या एसिडिटी की शिकायत आम है, खासकर तब जब पाचन कमजोर हो। रात में चावल खाने से यह परेशानी और बढ़ सकती है, क्योंकि उस समय मेटाबॉलिज्म धीमा रहता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में भी चावल सावधानी मांगता है। जब शरीर इंसुलिन को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तब ज्यादा चावल ब्लड शुगर और इंसुलिन दोनों को असंतुलित कर सकता है। यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ाती है।

ऐसी हेल्थ कंडीशन में चावल को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं, लेकिन विकल्प चुनना समझदारी है। ब्राउन राइस, मिलेट्स, ज्वार, बाजरा या ओट्स जैसे अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं और ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। सही मात्रा और सही विकल्प अपनाकर ही चावल से जुड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी बदलाव को अपनाने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह लेना ज़रूरी है।

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