Gut Health: शरीर पहले ही देता है चेतावनी, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज़

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आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अनियमित दिनचर्या, बाहर का तला-भुना खाना और लगातार बना रहने वाला तनाव हमारी सेहत पर चुपचाप असर डालता है। इसका सबसे पहला और गहरा प्रभाव गट हेल्थ यानी पाचन तंत्र पर पड़ता है। अक्सर लोग पेट से जुड़ी छोटी-छोटी परेशानियों को मामूली समझकर टाल देते हैं, जबकि हकीकत यह है कि शरीर बहुत पहले संकेत देना शुरू कर देता है।

गट हेल्थ सिर्फ खाना पचाने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध इम्यूनिटी, त्वचा की सेहत, मूड और पूरे दिन की एनर्जी से होता है। जब गट असंतुलित होता है, तो उसका असर पूरे शरीर में दिखने लगता है। बार-बार गैस, अपच और पेट फूलने की समस्या इस बात का इशारा हो सकती है कि पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा। गट में अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाने से भोजन सही ढंग से नहीं पच पाता और पेट हमेशा भारी-सा महसूस होता है।

खराब गट हेल्थ का दूसरा बड़ा संकेत लगातार थकान और एनर्जी की कमी है। जब पाचन कमजोर होता है, तो शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल सही मात्रा में नहीं मिल पाते। नतीजा यह होता है कि बिना ज्यादा काम किए भी थकान बनी रहती है और दिनभर सुस्ती महसूस होती है। इसका असर त्वचा पर भी साफ दिखाई देता है। मुंहासे, रैशेज, ड्राई स्किन या अचानक एलर्जी होना कई बार गट में बढ़े टॉक्सिन्स का नतीजा होता है, जो त्वचा के जरिए बाहर आने की कोशिश करते हैं।

अगर आपकी इम्यूनिटी कमजोर पड़ने लगी है और आप बार-बार सर्दी, खांसी या इंफेक्शन की चपेट में आ जाते हैं, तो इसके पीछे भी गट हेल्थ की भूमिका हो सकती है। माना जाता है कि शरीर की लगभग 70 प्रतिशत रोग प्रतिरोधक क्षमता गट से जुड़ी होती है। इसके अलावा बिना किसी खास वजह के चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी या लो फील करना भी खराब गट हेल्थ से जुड़ा हो सकता है। यही कारण है कि गट को अक्सर ‘दूसरा दिमाग’ कहा जाता है।

अच्छी बात यह है कि थोड़े-से बदलाव करके गट हेल्थ को फिर से बेहतर बनाया जा सकता है। रोज़मर्रा की डाइट में दही, छाछ और फर्मेंटेड फूड शामिल करने से अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं। फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पाचन को मजबूत बनाते हैं और आंतों को साफ रखने में मदद करते हैं। पर्याप्त पानी पीना पाचन प्रक्रिया को सुचारू रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है।

मानसिक तनाव को नजरअंदाज करना भी गट हेल्थ के लिए नुकसानदायक होता है। योग, ध्यान और गहरी सांस लेने की आदत गट और दिमाग—दोनों को संतुलित रखने में मदद करती है। वहीं जरूरत से ज्यादा जंक फूड, प्रोसेस्ड खाना और शुगर गट बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित रखना बेहद जरूरी है।

कुल मिलाकर, गट हेल्थ को हल्के में लेना बड़ी गलती साबित हो सकती है। अगर शरीर के दिए संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए और खान-पान व लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे सुधार किए जाएं, तो न सिर्फ पाचन बल्कि पूरी सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है।

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