डिप्रेशन से बचाव का आसान मंत्र – रोज 1 घंटा बदलें, 40% तक घट सकता है जोखिम

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, थकान, किसी काम में मन न लगना, नींद या भूख में कमी और खुद को बेकार महसूस करना—ये सभी डिप्रेशन के आम संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए तो स्थिति को संभालना आसान हो जाता है।

देश में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। लाखों लोग डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों ने एक बेहद आसान और असरदार उपाय बताया है—रोजाना की एक आदत में सिर्फ एक घंटे का बदलाव।

शोध के मुताबिक अगर हम टीवी देखने या मोबाइल स्क्रीन पर बिताए समय में से सिर्फ एक घंटा कम करके उसे शारीरिक गतिविधियों में लगाएं, तो डिप्रेशन का खतरा लगभग 40% तक घट सकता है। यह बदलाव बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन इसका असर बेहद सकारात्मक हो सकता है।

यूरोपियन साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, टीवी या स्क्रीन टाइम की जगह अगर हम व्यायाम, खेल-कूद, हल्की रनिंग, वॉक या यहां तक कि अतिरिक्त नींद लेने में समय लगाते हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य पर इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि केवल 30 मिनट की एक्टिविटी से भी डिप्रेशन का खतरा लगभग 18% तक कम देखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रीन के सामने लंबे समय तक बैठे रहना दिमाग को निष्क्रिय बनाता है। इससे डोपामाइन का संतुलन बिगड़ सकता है, सोशल आइसोलेशन बढ़ सकता है और अनहेल्दी खान-पान की आदतें विकसित हो सकती हैं—जो डिप्रेशन के जोखिम को और बढ़ाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization के मुताबिक दुनियाभर में करोड़ों लोग डिप्रेशन से प्रभावित हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

नीदरलैंड्स की University of Groningen के विशेषज्ञों ने भी बताया कि यह सिर्फ बैठे रहने का मामला नहीं है, बल्कि पैसिव एक्टिविटी यानी बिना दिमागी सक्रियता वाली आदतें मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

मेंटल हेल्थ बेहतर रखने के लिए विशेषज्ञ कुछ सरल उपाय सुझाते हैं—रोज 30-60 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी, 7-8 घंटे की गहरी नींद, माइंडफुलनेस या मेडिटेशन, और सोशल इंटरैक्शन को बढ़ाना। नियमित व्यायाम शरीर में स्ट्रेस हार्मोन को कम करता है और “फील गुड” हार्मोन को बढ़ाता है, जिससे मूड बेहतर होता है।

याद रखें, डिप्रेशन कोई कमजोरी नहीं बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है। अगर लगातार उदासी या व्यवहार में बदलाव महसूस हो, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। लेकिन अगर आप आज से ही एक घंटा स्क्रीन से हटाकर खुद को दें, तो यह छोटा कदम आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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