जरूरत की खबर: घर के पास हर गली में स्ट्रीट फूड? बढ़ सकता है शुगर और मोटापे का खतरा, जानिए कैसे बचें

Spread the love

अगर आपके घर के आसपास हर नुक्कड़ पर चाट, समोसा, बर्गर, रोल या तली-भुनी चीज़ों की दुकानें सजी रहती हैं, तो यह सिर्फ स्वाद का मामला नहीं है—यह आपकी सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी हो सकता है। नई रिसर्च में सामने आया है कि जिन इलाकों में स्ट्रीट फूड और फास्ट-फूड आउटलेट ज्यादा होते हैं, वहां रहने वाले लोगों में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग दोगुना तक बढ़ जाता है।

यह निष्कर्ष Madras Diabetes Research Foundation की एक स्टडी में सामने आया, जिसे यूके के डॉक्टरों के साथ मिलकर किया गया। शोध में पाया गया कि जिन इलाकों में अनहेल्दी फूड आउटलेट ज्यादा थे, वहां मेटाबॉलिक डिजीज—जैसे मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और डायबिटीज—का जोखिम कहीं अधिक था। यही स्थिति आगे चलकर ‘डायबिसिटी’ यानी मोटापा और डायबिटीज के खतरनाक मेल को जन्म देती है।

विशेषज्ञ डॉ. आशीष मेहरोत्रा (कंसल्टेंट, क्रिटिकल केयर, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर) के मुताबिक, हम आमतौर पर अपने घर के आसपास उपलब्ध विकल्पों को ही चुनते हैं। अगर पास में हेल्दी विकल्प कम और तला-भुना या प्रोसेस्ड फूड ज्यादा होगा, तो स्वाभाविक रूप से हमारी आदतें भी उसी दिशा में झुक जाएंगी। सुविधा, सस्ता दाम और स्वाद—ये तीन कारण स्ट्रीट फूड को रोजमर्रा की पसंद बना देते हैं।

रिसर्च यह भी बताती है कि फास्ट फूड में मौजूद रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट—जैसे मैदा और चीनी—शरीर में उसी तरह प्रतिक्रिया कर सकते हैं जैसे नशीले पदार्थ। 2018 में साइंस जर्नल Clinical Chemistry में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, ऐसे फूड ब्लड शुगर और इंसुलिन लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं, जिससे दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है। यही ‘हैपी हार्मोन’ हमें बार-बार वही चीज़ खाने की क्रेविंग देता है और धीरे-धीरे यह आदत लत का रूप ले सकती है।

2013 में ResearchGate पर प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, ज्यादा फास्ट फूड सेवन मेटाबॉलिक सिंड्रोम के खतरे को बढ़ाता है। हाई कैलोरी, सैचुरेटेड फैट, नमक और शुगर शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ती है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है।

सिर्फ खाना ही नहीं, आसपास की जीवनशैली सुविधाएं भी अहम भूमिका निभाती हैं। स्टडी में यह भी पाया गया कि जिन लोगों में डायबिसिटी थी, उनमें से 56.2% लोग पार्क, जिम, प्लेग्राउंड या स्पोर्ट्स क्लब जैसी जगहों से 1.1 किलोमीटर से ज्यादा दूर रहते थे। यानी अगर आपके आसपास चलने-फिरने और एक्सरसाइज की सुविधा नहीं है, तो जोखिम और बढ़ सकता है।

अब सवाल है—क्या किया जाए? सबसे पहली लड़ाई आपके किचन से शुरू होती है। जब आप बाजार जाएं, तो हेल्दी फूड खरीदने का फैसला वहीं करें। घर में फल, सलाद, दालें, अंकुरित अनाज और नट्स रखें, ताकि भूख लगने पर पहला विकल्प जंक फूड नहीं, बल्कि पौष्टिक भोजन हो।

फूड हैबिट सुधारने के लिए कुछ आसान लेकिन असरदार कदम अपनाए जा सकते हैं। रोज कम से कम 30 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करें। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। लंबे समय तक बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में स्ट्रेचिंग करें। भोजन करते समय मोबाइल या टीवी से दूरी रखें ताकि ओवरईटिंग न हो। रात का खाना सोने से 2–3 घंटे पहले खाएं, 7–8 घंटे की नींद लें और दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं।

याद रखिए, स्ट्रीट फूड कभी-कभार स्वाद के लिए ठीक है, लेकिन अगर वह रोज की आदत बन जाए तो यह धीरे-धीरे शरीर पर असर डालता है। आपके घर के आसपास का फूड एनवायर्नमेंट आपकी सेहत की दिशा तय कर सकता है। समझदारी इसी में है कि स्वाद और सेहत के बीच संतुलन बनाया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *