आजकल खराब लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान की वजह से कई लोग Irritable Bowel Syndrome यानी IBS की समस्या से जूझ रहे हैं। इस परेशानी में पेट दर्द, कब्ज, दस्त, गैस और सूजन जैसी दिक्कतें लगातार बनी रहती हैं। कई लोग लंबे समय तक दवाइयों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन सही खानपान अपनाकर भी इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सॉल्युबल फाइबर IBS मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
सॉल्युबल फाइबर एक खास प्रकार का डाइटरी फाइबर होता है, जो पानी में घुलकर जेल जैसी बनावट बना लेता है। यह पाचन प्रक्रिया को धीमा और संतुलित बनाता है, जिससे आंतों पर दबाव कम पड़ता है और पेट को आराम मिलता है। यही वजह है कि IBS के मरीजों में यह कब्ज और दस्त दोनों स्थितियों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
डॉक्टर्स का मानना है कि सॉल्युबल फाइबर आंतों की मूवमेंट को संतुलित रखता है और पेट की सूजन व गैस जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से पेट की असहजता में राहत मिल सकती है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है।
सॉल्युबल फाइबर कई प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में आसानी से मिल जाता है। ओट्स, सेब, केला, गाजर, चुकंदर, अलसी और मूंग जैसी चीजें इसके अच्छे स्रोत मानी जाती हैं। इन चीजों को रोजाना की डाइट में शामिल करके IBS के लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना लगभग 20 से 30 ग्राम सॉल्युबल फाइबर लेना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि इसकी मात्रा अचानक बढ़ाने से बचना चाहिए, क्योंकि ज्यादा फाइबर एकदम से लेने पर गैस, पेट फूलना और दर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए इसे धीरे-धीरे डाइट में शामिल करना बेहतर माना जाता है।
फाइबर के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बेहद जरूरी है। अगर शरीर में पानी की कमी हो तो फाइबर सही तरीके से काम नहीं कर पाता। इसके अलावा हल्की एक्सरसाइज, योग, मेडिटेशन और अच्छी नींद भी IBS के लक्षणों को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि हर व्यक्ति का शरीर अलग तरीके से प्रतिक्रिया करता है, इसलिए IBS मरीजों को अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइट एक्सपर्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए।