आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और तनाव का सबसे बड़ा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। कब्ज, गैस, एसिडिटी और पेट भारी रहने जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। ऐसे में तुरंत राहत देने वाली दवाएं भले ही असर दिखा दें, लेकिन लंबे समय में उनके साइड इफेक्ट भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के तौर पर ईसबगोल को फिर से याद किया जा रहा है।
ईसबगोल दरअसल Plantago ovata नामक पौधे के बीजों की भूसी से तैयार होता है। इसमें घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि आयुर्वेद और पारंपरिक घरेलू उपचारों में इसका इस्तेमाल वर्षों से होता आ रहा है।
कब्ज की समस्या में ईसबगोल सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है। यह आंतों में पानी सोखकर मल को नरम बनाता है, जिससे पेट साफ होने में आसानी होती है। रोज रात को गुनगुने पानी या दूध के साथ एक चम्मच ईसबगोल लेने से पुरानी कब्ज में भी राहत मिल सकती है।
गैस, एसिडिटी और अपच की परेशानी में भी यह लाभकारी है। ईसबगोल पेट की अंदरूनी परत को शांत करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। दही के साथ लेने पर सीने में जलन और एसिडिटी में कमी महसूस हो सकती है।
कम लोग जानते हैं कि ईसबगोल दिल की सेहत के लिए भी उपयोगी है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद कर सकता है। नियमित सेवन से हृदय रोगों का खतरा घटाने और ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में सहायता मिल सकती है।
वजन नियंत्रित करने में भी यह सहायक है। ईसबगोल पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार खाने की आदत कम होती है। साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को भी लाभ हो सकता है।
सेवन के लिए ईसबगोल को गुनगुने पानी, दूध या दही के साथ लिया जा सकता है। आमतौर पर रात को सोने से पहले इसका सेवन अधिक फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, इसे लेने के बाद पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, वरना उल्टा असर भी हो सकता है।
ध्यान रहे कि किसी भी प्राकृतिक उपाय की तरह ईसबगोल का सेवन भी सीमित मात्रा में ही करें। गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका इस्तेमाल करें।